कैसे मैं बरसात लिखूँ!

कैसे लिखूँ मैं चाँद के क़िस्से कैसे लिखूँ मैं फूल की बात,
रेत उड़ाए गर्म हवा तो कैसे मैं बरसात लिखूँ|

जावेद अख़्तर

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