मित्रता और पवित्रता!

आज एक बार फिर मैं हिन्दी में अपने किस्म के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|  

भवानी दादा की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की यह कविता  – 

आडम्बर में
समाप्त न होने पाए
पवित्रता

और समाप्त न होने पाए
मित्रता
शिष्टाचार में

सम्भावना है
इतना-भर
अवधान-पूर्वक

प्राण-पूर्वक सहेजना है
मित्रता और
पवित्रता को !

 (आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

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2 responses to “मित्रता और पवित्रता!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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