कसीली बात लिखूँ!

किन लफ़्ज़ों में इतनी कड़वी इतनी कसीली बात लिखूँ,
शे’र की मैं तहज़ीब बना हूँ या अपने हालात लिखूँ|

जावेद अख़्तर

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