दीपक पर परवाने आए!

आज एक बार फिर मैं हिन्दी गीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी का एक गीत  शेयर कर रहा हूँ|  

बच्चन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी का यह गीत  – 

दीपक पर परवाने आए!

अपने पर फड़काते आए,
किरणों पर बलखाते आए,
बड़ी-बड़ी इच्छाएँ लाए, बड़ी-बड़ी आशाएँ लाए!
दीपक पर परवाने आए!

जले ज्वलित आलिंगन में कुछ,
जले अग्निमय चुंबन में कुछ,
रहे अधजले, रहे दूर कुछ, किंतु न वापस जाने पाए!
दीपक पर परवाने आए!

पहुँच गई बिस्तुइया सत्वर
लिए उदर की ज्वाल भयंकर,
बचे प्रणय की ज्वाला से जो, उदर-ज्वाल के बीच समाए!
दीपक पर परवाने आए!

 (आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

                                     ********

5 responses to “दीपक पर परवाने आए!”

  1. बहुत सुंदर।

    Liked by 2 people

    1. हार्दिक धन्यवाद जी

      Liked by 2 people

  2. नमस्कार 🙏🏻

    Liked by 1 person

    1. नमस्कार जी

      Like

Leave a comment