इश्क़ रुस्वा हो चला!

इश्क़ रुस्वा हो चला बे-कैफ़ सा बेज़ार सा,
आज उस की नर्गिस-ए-ग़म्माज़ की बातें करो|

फ़िराक़ गोरखपुरी

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