जम्अ करते रहे जो अपने को ज़र्रा ज़र्रा,
वो ये क्या जानें बिखरने में सुकूँ कितना है|
शहरयार
A sky full of cotton beads like clouds
जम्अ करते रहे जो अपने को ज़र्रा ज़र्रा,
वो ये क्या जानें बिखरने में सुकूँ कितना है|
शहरयार
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