मदहोशी में एहसास!

मद-होशी में एहसास के ऊँचे ज़ीने से गिर जाने दे,
इस वक़्त न मुझ को थाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है|

क़तील शिफ़ाई

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