आओ मिल आएँ !

दो घड़ी आओ मिल आएँ किसी ‘ग़ालिब’ से ‘क़तील’,
हज़रत-ए-‘ज़ौक़’ तो वाबस्ता हैं दरबार के साथ|

क़तील शिफ़ाई

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