दूरियाँ कभी क़ुर्बतें!

सभी कुछ है तेरा दिया हुआ सभी राहतें सभी कुल्फ़तें,
कभी सोहबतें कभी फ़ुर्क़तें कभी दूरियाँ कभी क़ुर्बतें|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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