आज का ग़म न कर!

मिरी जान आज का ग़म न कर कि न जाने कातिब-ए-वक़्त ने,
किसी अपने कल में भी भूल कर कहीं लिख रखी हों मसर्रतें|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

Leave a comment