मिरी जान आज का ग़म न कर कि न जाने कातिब-ए-वक़्त ने,
किसी अपने कल में भी भूल कर कहीं लिख रखी हों मसर्रतें|
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
A sky full of cotton beads like clouds
मिरी जान आज का ग़म न कर कि न जाने कातिब-ए-वक़्त ने,
किसी अपने कल में भी भूल कर कहीं लिख रखी हों मसर्रतें|
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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