उस में होगी ख़ामी भी!

ऐसा तो मुमकिन ही नहीं है चाँद में कोई दाग़ न हो,
जिस में होगी कुछ भी ख़ूबी उस में होगी ख़ामी भी|

क़ैसर शमीम

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