मिसाल-ए-क़तरा!

मिलो जो हम से तो मिल लो कि हम ब-नोक-ए-गियाह,
मिसाल-ए-क़तरा-ए-शबनम रहे रहे न रहे|

नज़ीर अकबराबादी

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