मिटते मिटते दे गए!

मिटते मिटते दे गए हम ज़िंदगी को रंग-ओ-नूर,
रफ़्ता रफ़्ता बन गए इस अहद का अफ़्साना हम|

अली सरदार जाफ़री

2 responses to “मिटते मिटते दे गए!”

  1. लाज़वाब

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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