हाथ में यही हाथ था!

मिरे शाने पर यही ज़ुल्फ़ थी जो है आज मुझ से खिंची खिंची,
मिरे हाथ में यही हाथ था तुम्हें याद हो कि न याद हो|

नज़ीर बनारसी

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