टूटे साज़ की वो सदा!

मिरी बेबसी ने ज़बान तक जिसे ला के तुम को रुला दिया,
मिरे टूटे साज़ की वो सदा तुम्हें याद हो कि न याद हो|

नज़ीर बनारसी

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