बाग़ में ख़ुश ख़ुश बैठे!

किन राहों से हो कर आई हो किस गुल का संदेसा लाई हो,
हम बाग़ में ख़ुश ख़ुश बैठे थे क्या कर दिया आ के सबा तुम ने|

इब्न-ए-इंशा

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