दर्द से दी है सदा!

अब रह-रव-ए-माँदा से कुछ न कहो हाँ शाद रहो आबाद रहो,
बड़ी देर से याद किया तुम ने बड़ी दर्द से दी है सदा तुम ने|

इब्न-ए-इंशा

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