उस हुस्न के नाम पे!

उस हुस्न के नाम पे याद आए सब मंज़र ‘फ़ैज़’ की नज़्मों के,
वही रंग-ए-हिना वही बंद-ए-क़बा वही फूल खिले पैराहन में|

इब्न-ए-इंशा

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