अर्श पे तारे कहलाए!

कुछ वो जिन्हें हम से निस्बत थी उन कूचों में आन आबाद हुए,
कुछ अर्श पे तारे कहलाए कुछ फूल बने जा गुलशन में|

इब्न-ए-इंशा

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