ग़म है तो मुझे क्या!

ऐ दोस्त! तिरी आँख जो नम है तो मुझे क्या,
मैं ख़ूब हँसूँगा तुझे ग़म है तो मुझे क्या|

क़तील शिफ़ाई

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