सिर्फ़ रंग-ओ-बू नहीं!

बाज़ू छुआ जो तू ने तो उस दिन खुला ये राज़,
तू सिर्फ़ रंग-ओ-बू ही नहीं है बदन भी है|

जाँ निसार अख़्तर

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