बदन के जाम ने!

कलाम अरूज़ तग़ज़्ज़ुल ख़याल ज़ौक़-ए-जमाल,
बदन के जाम ने अल्फ़ाज़ की सुराही भरी|

शहज़ाद क़ैस

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