गुलाब अम्बर-ओ!

गुलाब अम्बर-ओ-रैहान मोतिया लोबान,
किसी की ज़ुल्फ़-ए-मो’अत्तर में सब की ख़ुशबू मिली|

शहज़ाद क़ैस

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