आज मैं हिन्दी की श्रेष्ठ कवियित्री स्वर्गीया सुमित्रा कुमारी सिन्हा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|
इनकी रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं|
लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीया सुमित्रा कुमारी सिन्हा जी की यह कविता-

पल भर न हुआ जीवन प्यारा!
पूजा के मंदिर में झाँका,
अर्चन की चाहों को आँका,
जग ने अपराधिनि ठहराया,
आजीवन खुल न सकी कारा!
पल भर न हुआ जीवन प्यारा!
मधु के घट रक्खे दूर-दूर,
जब छूना चाहा हुए चूर,
जग अंतराल से पिला सका
मुझको केवल विष की धारा!
पल भर न हुआ जीवन प्यारा!
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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