झुकी झुकी सी घटाएँ!

तुम्हारी ज़ुल्फ़ों से ख़ुशबू की भीक लेने को,
झुकी झुकी सी घटाएँ बुला रही हैं तुम्हें|

साहिर लुधियानवी

Leave a comment