कोई साया मिरे!

रास्ते भर कोई आहट थी कि आती ही रही,
कोई साया मिरे बाज़ू से गुज़रता ही रहा|

जाँ निसार अख़्तर

2 responses to “कोई साया मिरे!”

  1. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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