मेरा ख़्वाब-ए-जवानी

झूट है सब तारीख़ हमेशा अपने को दोहराती है,
अच्छा मेरा ख़्वाब-ए-जवानी थोड़ा सा दोहराए तो.

अंदलीब शादानी

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