सुनते हैं कि काँटे से गुल तक हैं राह में लाखों वीराने,
कहता है मगर ये अज़्म-ए-जुनूँ सहरा से गुलिस्ताँ दूर नहीं|
मजरूह सुल्तानपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
सुनते हैं कि काँटे से गुल तक हैं राह में लाखों वीराने,
कहता है मगर ये अज़्म-ए-जुनूँ सहरा से गुलिस्ताँ दूर नहीं|
मजरूह सुल्तानपुरी
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