वो कौन सी सुब्हें हैं जिन में बेदार नहीं अफ़्सूँ तेरा,
वो कौन सी काली रातें हैं जो मेरे नशे में चूर नहीं|
मजरूह सुल्तानपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
वो कौन सी सुब्हें हैं जिन में बेदार नहीं अफ़्सूँ तेरा,
वो कौन सी काली रातें हैं जो मेरे नशे में चूर नहीं|
मजरूह सुल्तानपुरी
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