मेरे नशे में चूर नहीं!

वो कौन सी सुब्हें हैं जिन में बेदार नहीं अफ़्सूँ तेरा,

वो कौन सी काली रातें हैं जो मेरे नशे में चूर नहीं|

मजरूह सुल्तानपुरी

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