तक़दीर का शिकवा बे-मअ’नी जीना ही तुझे मंज़ूर नहीं,
आप अपना मुक़द्दर बन न सके इतना तो कोई मजबूर नहीं|
मजरूह सुल्तानपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
तक़दीर का शिकवा बे-मअ’नी जीना ही तुझे मंज़ूर नहीं,
आप अपना मुक़द्दर बन न सके इतना तो कोई मजबूर नहीं|
मजरूह सुल्तानपुरी
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