आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठकवि श्री अनूप अशेष जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|
अनूप जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|
लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अनूप अशेष जी की यह कविता-

दो कमरे का घर
दस देहों की गंध
और तुम
हर कोने में।
हर बासी सुबहों
बासी ख़बरों में,
लंगड़े पाँवों
दौड़े दिन
ज्यों हवा परों में।
उम्र दोपहर
रात उनींदी
तुम होने में।
एक हँसी काली आँखों में
दूध-चंद्रमा,
बुझी अँगीठी
गर्म-सड़क पर
शिवा-उमा।
सागर-मंथन का
अमृत-विष
एक दोने में।
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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