बँधुआ मज़दूरों से अब!

सारी उम्र छुड़ाते गुज़रे महाजनों से – चेहरे,
बँधुआ मज़दूरों से अब तो जीवन हुये सभी के|

सूर्यभानु गुप्त  

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