सवाब का काम करो!

दिल की मताअतो लूट रहे हो हुस्न की दी है ज़कात कभी,

रोज़-ए-हिसाब क़रीब है लोगो कुछ तो सवाब का काम करो|

इब्न-ए-इंशा 

Leave a comment