दिल की मताअ‘ तो लूट रहे हो हुस्न की दी है ज़कात कभी,
रोज़-ए-हिसाब क़रीब है लोगो कुछ तो सवाब का काम करो|
इब्न-ए-इंशा
A sky full of cotton beads like clouds
दिल की मताअ‘ तो लूट रहे हो हुस्न की दी है ज़कात कभी,
रोज़-ए-हिसाब क़रीब है लोगो कुछ तो सवाब का काम करो|
इब्न-ए-इंशा
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