तुझी को ख़बर न मिले

ख़ार-ओ-ख़स-ओ-ख़ाशाक तो जानें एक तुझी को ख़बर मिले,

गुल-ए-ख़ूबी हम तो अबस बदनाम हुए गुलज़ार के बीच|

इब्न-ए-इंशा 

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