मिन्नत-ए-क़ासिद कौन उठाए शिकवा-ए-दरबाँ कौन करे,
नामा-ए-शौक़ ग़ज़ल की सूरत छपने को दो अख़बार के बीच|
इब्न-ए-इंशा
A sky full of cotton beads like clouds
मिन्नत-ए-क़ासिद कौन उठाए शिकवा-ए-दरबाँ कौन करे,
नामा-ए-शौक़ ग़ज़ल की सूरत छपने को दो अख़बार के बीच|
इब्न-ए-इंशा
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