इक जाम खनकता जाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है,
इक होश-रुबा इनआ‘म कि साक़ी रात गुज़रने वाली है|
क़तील शिफ़ाई
A sky full of cotton beads like clouds
इक जाम खनकता जाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है,
इक होश-रुबा इनआ‘म कि साक़ी रात गुज़रने वाली है|
क़तील शिफ़ाई
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