दुआ क्यूँ नहीं देते!

ख़ामोश हो क्यूँ दाद-ए-जफ़ा क्यूँ नहीं देते,

बिस्मिल हो तो क़ातिल को दुआ क्यूँ नहीं देते|

अहमद फ़राज़ 

2 responses to “दुआ क्यूँ नहीं देते!”

  1. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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