वो ज़बाँ हूँ अब जिसे!

सब की सुनता जा रहा हूँ और कुछ कहता नहीं,

वो ज़बाँ हूँ अब जिसे दाँतों में रहना आ गया|

आनंद नारायण मुल्ला

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