रुस्वा हो सा जाता हूँ!

तुझे बाँहों में भर लेने की ख़्वाहिश यूँ उभरती है,

कि मैं अपनी नज़र में आप रुस्वा हो सा जाता हूँ|   

जाँ निसार अख़्तर

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