मगर वो लम्हा जब मैं!

मुझे मालूम है मैं सारी दुनिया की अमानत हूँ,

मगर वो लम्हा जब मैं सिर्फ़ अपना हो सा जाता हूँ|

जाँ निसार अख़्तर

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