कहीं ज़ुल्मतों में घिर कर है तलाश-ए-दश्त-ए-रहबर,
कहीं जगमगा उठी हैं मिरे नक़्श-ए-पा से राहें|
मजरूह सुल्तानपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
कहीं ज़ुल्मतों में घिर कर है तलाश-ए-दश्त-ए-रहबर,
कहीं जगमगा उठी हैं मिरे नक़्श-ए-पा से राहें|
मजरूह सुल्तानपुरी
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