अहंकार और विनयशीलता!

कल मैंने ज्ञानमार्ग और प्रेम मार्ग के बहाने कुछ लिखा था| आज मुझे राजनैतिक परिदृश्य से उसका एक उदाहरण याद आ रहा है, यद्यपि राजनीति के मामले में सबकी राय अलग रहती है और कुछ लोगों की बहुत कठोर धारणाएं होती हैं कुछ नेताओं के बारे में, लेकिन फिर भी जो बात मेरे मन में आ गई है, वो तो मैं कहूँगा ही|

हमने बहुत से अवसरों पर देखा है कि मोदी जी, जिनको बहुत से लोग तानाशाह, जिद्दी और न जाने क्या-क्या कहते हैं, वे मोदी जी किसी वृद्ध पुरुष अथवा महिला के पाँव बहुत सहज ढंग से छू लेते हैं| भले ही उस पुरुष अथवा महिला ने कोई बड़ा काम किया हो अथवा किसी निर्माण कार्य के भागीदार रहे हों| ऐसा बहुत बार देखा गया है कि मोदी जी किसी व्यक्ति के, वो बालक से लेकर वृद्ध तक किसी भी अवस्था का हो, उसके पैर छू लेते हैं| ऐसा करने के लिए मनुष्य का अहंकार शून्य होना अत्यंत आवश्यक है| अहंकारी मनुष्य के लिए किसी के भी पाँव छूना आसान नहीं होता|

मुझे यह भी ध्यान आता है कि दूसरी ओर राहुल गांधी के पाँव अक्सर लोग छूते हैं, जिनमें बुज़ुर्ग लोग भी होते हैं और राहुल गांधी को उनसे अपने पाँव छुआते हुए कोई संकोच नहीं होता| लोग मानते हैं लेकिन राहुल गांधी के संस्कार राजसी खानदान वाले हैं| यहाँ मैं किसी राजनैतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं बोल रहा हूँ अपितु केवल संस्कारों के स्तर पर दो व्यक्तियों की तुलना कर रहा हूँ| जहां मुहब्बत की दुकान चलाने वाले राहुल गांधी यह कहने में भी नहीं चूकते कि लोग मोदी जी को डंडों से पीटेंगे|

यह कहा जाता है कि जैसे ही मनुष्य का अहंकार समाप्त हो जाता वह धीरे-धीरे सर्वप्रिय होने की ओर आगे बढ़ जाता है| अहंकार पालने वाला मनुष्य अपने धनबल अथवा अन्य किसी भी प्रकार के बल द्वारा केवल लोगों को अपने अधीन रख सकता है| 

एक और बात याद आ रही है, एक पुराने कांग्रेसी नेता, जो उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री और केन्द्रीय रेल मंत्री भी रहे थे, स्वर्गीय कमलापति त्रिपाठी जी एक विद्वान व्यक्ति थे, सामान्यतः जो लोग उनसे मिलते थे वे सब उनके पाँव छूते थे, एक बार किसी ने उनसे पूछा था, इतने सारे लोग आपके पाँव छूते हैं, क्या वो सब आपको याद रहते हैं? इस पर उनका उत्तर था कि जो पाँव नहीं छूता वो याद रहता है|  

 आज फिर से एक बार प्रेम, मन की सरलता और अहंकार हीनता के बारे में थोड़ी बात कर ली, अंत में मुकेश जी के एक गीत की कुछ पंक्तियाँ-

दिल जो भी कहेगा मानेंगे,

दुनिया में हमारा दिल ही तो है|

कोई साथी न कोई सहारा,

कोई मंजिल ना कोई इशारा,

रुक गए हम जहां दिल ने रोका,

चल दिए जिस तरफ दिल पुकारा|

हम प्यार के प्यासे लोगों की

मंजिल का इशारा दिल ही तो है|

 (आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

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2 responses to “अहंकार और विनयशीलता!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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