इश्क़ ने जब बे-नियाज़

आप समझाने भी आए क़िबला-ओ-काबा तो कब,

इश्क़ ने जब बे-नियाज़-ए-दीन-ओ-दुनिया कर दिया|

नज़ीर बनारसी

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