रंग उड़ाया लोगों ने!

‘मीर-तक़ी’ के रंग का ग़ाज़ा* रू-ए-ग़ज़ल पर आ न सका,

‘कैफ़’ हमारे ‘मीर-तक़ी’ का रंग उड़ाया लोगों ने|  

*गुलाबीपन

कैफ़ भोपाली

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