रंग और नस्ल ज़ात!

रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है,

इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने|

साहिर लुधियानवी

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