छुपे हुए उलझाव बहुत

अपने-आप में उलझी हुई इक दुनिया है हर शख़्स यहाँ,

सुलझे हुए ज़ेहनों में भी हैं छुपे हुए उलझाव बहुत|

क़ैसर शमीम

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