ऐ सख़ियो ऐ ख़ुश-नज़रो यक गूना करम ख़ैरात करो,
नारा-ज़नाँ कुछ लोग फिरें हैं सुब्ह से शहर-ए-निगार* के बीच|
*CityOfBeauty
इब्न-ए-इंशा
A sky full of cotton beads like clouds
ऐ सख़ियो ऐ ख़ुश-नज़रो यक गूना करम ख़ैरात करो,
नारा-ज़नाँ कुछ लोग फिरें हैं सुब्ह से शहर-ए-निगार* के बीच|
*CityOfBeauty
इब्न-ए-इंशा
Leave a comment