शहर-ए-निगार!

ऐ सख़ियो ऐ ख़ुश-नज़रो यक गूना करम ख़ैरात करो,

नारा-ज़नाँ कुछ लोग फिरें हैं सुब्ह से शहर-ए-निगार* के बीच|

*CityOfBeauty

इब्न-ए-इंशा

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