कहीं मर न जाऊँ मैं!

सुनता हूँ अब किसी से वफ़ा कर रहा है वो,

ऐ ज़िंदगी ख़ुशी से कहीं मर न जाऊँ मैं|

क़तील शिफ़ाई

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