ज़ुल्फ़ के ख़म याद आ गए!

सुलझाईं जब भी ज़ीस्त की ‘साग़र’ ने गुत्थियाँ,

नागाह तेरी ज़ुल्फ़ के ख़म याद आ गए|    

साग़र ख़य्यामी

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