ये कतबे भी पढ़ा कर!

उजड़े हुए लोगों से गुरेज़ाँ* न हुआ कर,

हालात की क़ब्रों के ये कतबे भी पढ़ा कर|

*दूर रहना

मोहसिन नक़वी

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